भारतीय जनता पार्टी ने 51वीं बरसी पर लोकतंत्र सेनानियों का किया सम्मान, आपातकाल के काले अध्याय को किया स्मरण
सागर

सागर 25 जून 1975 को देश पर आपातकाल थोप दिया गया। यह बात मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. राजेन्द्र शुक्ल ने सागर में आपातकाल की 51वीं बरसी पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते
कार्यक्रम को भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी एवं लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट कृष्णवीर सिंह ठाकुर संभागीय अध्यक्ष मधु गुप्ता ने भी संबोधित किया । इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों ने आपातकाल के दौरान झेली गई यातनाओं, संघर्ष और उस कालखंड के मार्मिक संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों का सम्मान भी किया गया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री डॉ. राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारतीय राजनीति में नैतिकता और लोकतांत्रिक मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रस्तुत किया, जिन्होंने सत्ता के लिए कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इसके विपरीत आपातकाल के दौरान न्यायपालिका की अवमानना की गई, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, संविधान में संशोधन कर न्यायपालिका के अधिकार सीमित किए गए तथा हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक नेताओं और लोकतंत्र समर्थकों को रातों-रात गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया। यह केवल लोकतंत्र की हत्या नहीं थी, बल्कि पहले लोकतंत्र का अपहरण किया गया और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई।
डॉ. शुक्ल ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजादी दिलाई, जबकि लोकतंत्र सेनानियों ने लोकतंत्र को बचाने का कार्य किया। यदि उस समय लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में संपूर्ण क्रांति का आंदोलन न हुआ होता, छात्र आंदोलनों ने जनजागरण न किया होता तथा अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी सहित हजारों राष्ट्रनिष्ठ कार्यकर्ताओं और मीसाबंदियों ने संघर्ष न किया होता तो लोकतंत्र की पुनर्स्थापना संभव नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और स्वतंत्र पत्रकारिता जैसे चार मजबूत स्तंभों पर आधारित है और इन्हें कमजोर करने का हर प्रयास लोकतंत्र के लिए घातक होता है।
डॉ. शुक्ल ने कहा कि भारत को विश्वगुरु और आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा आवश्यक है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से प्रेरित भारत विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों एवं मीसाबंदियों के त्याग, संघर्ष और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनका योगदान सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।
कार्यक्रम अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट कृष्णवीर सिंह ठाकुर ने कहा कि 25 जून भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। भारत सरकार द्वारा इस दिन को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में घोषित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि 25-26 जून 1975 की मध्यरात्रि को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रताओं पर अभूतपूर्व प्रहार किया गया था।
आपातकाल के 19 महीने केवल जेलों की यातनाओं तक सीमित नहीं थे, बल्कि हजारों लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों ने आर्थिक, सामाजिक एवं मानसिक कष्ट झेले। अनेक परिवारों के दो-दो और तीन-तीन सदस्य जेलों में बंद रहे, महिलाओं ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में परिवारों का पालन-पोषण किया, लेकिन किसी ने भी लोकतंत्र और राष्ट्रहित के प्रति अपने संकल्प से समझौता नहीं किया। लोकतंत्र सेनानियों ने कभी सम्मान या पुरस्कार की अपेक्षा नहीं की, बल्कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर संघर्ष किया।
एडवोकेट कृष्णवीर सिंह ठाकुर ने कहा कि आपातकाल लोकतांत्रिक संस्थाओं को नियंत्रित करने की एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति थी। नागरिकों के मौलिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता तथा न्यायपालिका की प्रभावी भूमिका को सीमित कर पूरे देश को भय और दमन के वातावरण में बदल दिया गया। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के उस विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान कितना भी श्रेष्ठ क्यों न हो, यदि उसे संचालित करने वालों की नीयत और नीति ठीक न हो तो वह देश की रक्षा नहीं कर सकता
भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोकतंत्र सेनानियों एवं मीसाबंदियों के संघर्ष को स्मरण कर उनका सम्मान कर रही है।
आपातकाल की 51वीं बरसी के अवसर पर संभागीय भाजपा कार्यालय में आपातकाल के काले कालखंड पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री डॉ. राजेन्द्र शुक्ल सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने किया तथा लोकतंत्र सेनानियों, मीसाबंदियों एवं उनके परिजनों के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी श्री कृष्णवीर सिंह ठाकुर, श्री ज्ञानचंद जैन, श्री विनोद तिवारी, श्री किशन तिवारी, श्री महेन्द्र कुमार गुप्ता, श्री धीरज सिंह लोधी, श्री रामसेवक शाण्डिल्य,श्री परसराम श्याममानी, श्री ऋषभ कुमार जैन,श्री अब्दुल शमीम महेन्द्र सराफ लक्ष्मी नारायण नामदेव तथा दिवंगत लोकतंत्र सेनानी स्व.अमर सिंह, स्व. कोमल भंडारी, स्व.जमुना मिस्त्री, स्व. श्रीनाथ शर्मा, स्व. शिवराज सिंह राजपूत, स्व.मु.इंशाम राही, स्व. सुशील सोनी, स्व.इदरीश खान, स्व. मु.युनुस राही, स्व.स्वतंत्र सिंह चौहान, स्व. यशवंत गौर, स्व.डॉ. परिजनों का शॉल-श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।


