
मध्यप्रदेश की राजनीति में चर्चा में रहे बीना के दल-बदल प्रकरण मे निर्मला सप्रे को राहत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दी
जानकारी के मुताबिक, 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर आवेदन दिया गया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी कि स्पीकर को जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया जाए।
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रक्रिया जारी है। विधायक की ओर से जवाब भी दाखिल किया जा चुका है। साथ ही भाजपा और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों से भी टिप्पणियां मांगी गई हैं। 10 फरवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का बयान भी दर्ज किया जा चुका है।
विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि न तो उन्होंने कांग्रेस छोड़ी है और न ही भाजपा की सदस्यता ली है। उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि विधायक को कांग्रेस से निष्कासित किया गया है या उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली है। अदालत ने यह भी माना कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष कार्यवाही जारी है और उसमें प्रगति भी हुई है।
कोर्ट ने साफ कहा कि अभी ऐसा कोई आधार नहीं बनता, जिसके चलते स्पीकर को जल्द फैसला करने का निर्देश दिया जाए। इसी के साथ हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।
अब बीना विधायक की सदस्यता को लेकर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई पर ही टिका रहेगा।


