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शाहपुर शासकीय अस्पताल में नहीं मिले डॉक्टर, रेफर करने पर बुलाई एंबुलेंस

शाहपुर   शासकीय अस्पताल में नहीं मिले डॉक्टर, रेफर करने पर बुलाई एंबुलेंस

स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था


सागर    ज़िले के शाहपुर में बीते साल अगस्त में 8 बच्चों की मौत व स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों के नहीं मिलने पर अफसरों ने कार्रवाई की थी, लेकिन सुधार नहीं हुआ है। यहां अक्सर डॉक्टर व अन्य स्टाफ गायब रहता है। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के निरीक्षण में भी हुई लेकिन सख्ती से कार्रवाई नहीं होने के कारण यहां के लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है। यहां फिर समस्या हुई। यहां रामप्रसाद पटेल इलाज के लिए ले जाए गए तो मौके पर कोई डॉक्टर नहीं था। इन्हें सुबह करीब 7 बजे ले जाया गया था, स्टाफ ने तुरंत सागर रेंफर करने के लिए कहा। एंबुलेंस में किराना का सामान भरा हुआ था, मरीज को जगह ही नहीं थी इस कारण मरीज को सागर लाने में भी देरी हुई, इस पूरे मामले में सीएमएचओ व कलेक्टर को भी शिकायत की गई है। इसमें बताया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर में पिछले कई साल से डॉक्टर व स्टाफ अस्पताल में नहीं रह रहा है। इलाज भी नहीं हो रहा है। सीधा रेफर किया जा रहा है। रामप्रसाद पटेल को अस्पताल ले जाने पर तुरंत रेफर कर दिया गया। स्टाफ ने 108 से सागर ले जाने कहा। 108 को बुलाया तो उसके अंदर किराना का सामान भरा हुआ था। उसमें पापड़-खीचला मिले। इस कारण ड्राइवर ने सागर ले जाने से मना किया। इसके बाद एंबुलेंस से किराना का सामान बाहर निकलवाया। इसमें देर तक मरीज को सागर नहीं ले जाया जा सका। अस्पताल में 29 अप्रैल सुबह 9 बजे से 30 अप्रैल सुबह 9 बजे तक सुरेंद्र विश्नोई की ड्यूटी थी। इसके बाद 30 अप्रैल को सुबह 9 बजे से अगले दिन सुबह 9 बजे तक प्रशांत गंगवार की ड्यूटी थी। यह दोनों डॉक्टर अस्पताल में नहीं मिले। बच्चों की मौत के बाद भी नहीं सुधरा वकील जगमोहन सिंह ने बताया कि यहां बीते कई साल से स्थिति खराब र है। डॉक्टर व स्टाफ नहीं रहता है। इसकी शिकायत भी हुई है लेकिन सुधार नहीं हुआ है। दीवार गिरने से हुए हादसे पर भी अस्पताल में डॉक्टर व स्टाफ नहीं मिला था। इस कारण जिन बच्चों को बचाया जा सकता था उनकी भी मौत हो गई थी। अफसरों को सूचना दे दी है। अब भी यदि हालत नहीं सुधरी तो आंदोलन करेंगे ।स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था

सागर ज़िले के शाहपुर में बीते साल अगस्त में 8 बच्चों की मौत व स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों के नहीं मिलने पर अफसरों ने कार्रवाई की थी, लेकिन सुधार नहीं हुआ है। यहां अक्सर डॉक्टर व अन्य स्टाफ गायब रहता है। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के निरीक्षण में भी हुई लेकिन सख्ती से कार्रवाई नहीं होने के कारण यहां के लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है। यहां फिर समस्या हुई। यहां रामप्रसाद पटेल इलाज के लिए ले जाए गए तो मौके पर कोई डॉक्टर नहीं था। इन्हें सुबह करीब 7 बजे ले जाया गया था, स्टाफ ने तुरंत सागर रेंफर करने के लिए कहा। एंबुलेंस में किराना का सामान भरा हुआ था, मरीज को जगह ही नहीं थी इस कारण मरीज को सागर लाने में भी देरी हुई, इस पूरे मामले में सीएमएचओ व कलेक्टर को भी शिकायत की गई है। इसमें बताया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर में पिछले कई साल से डॉक्टर व स्टाफ अस्पताल में नहीं रह रहा है। इलाज भी नहीं हो रहा है। सीधा रेफर किया जा रहा है। रामप्रसाद पटेल को अस्पताल ले जाने पर तुरंत रेफर कर दिया गया। स्टाफ ने 108 से सागर ले जाने कहा। 108 को बुलाया तो उसके अंदर किराना का सामान भरा हुआ था। उसमें पापड़-खीचला मिले। इस कारण ड्राइवर ने सागर ले जाने से मना किया। इसके बाद एंबुलेंस से किराना का सामान बाहर निकलवाया। इसमें देर तक मरीज को सागर नहीं ले जाया जा सका। अस्पताल में 29 अप्रैल सुबह 9 बजे से 30 अप्रैल सुबह 9 बजे तक सुरेंद्र विश्नोई की ड्यूटी थी। इसके बाद 30 अप्रैल को सुबह 9 बजे से अगले दिन सुबह 9 बजे तक प्रशांत गंगवार की ड्यूटी थी। यह दोनों डॉक्टर अस्पताल में नहीं मिले। बच्चों की मौत के बाद भी नहीं सुधरा वकील जगमोहन सिंह ने बताया कि यहां बीते कई साल से स्थिति खराब र है। डॉक्टर व स्टाफ नहीं रहता है। इसकी शिकायत भी हुई है लेकिन सुधार नहीं हुआ है। दीवार गिरने से हुए हादसे पर भी अस्पताल में डॉक्टर व स्टाफ नहीं मिला था। इस कारण जिन बच्चों को बचाया जा सकता था उनकी भी मौत हो गई थी। अफसरों को सूचना दे दी है। अब भी यदि हालत नहीं सुधरी तो आंदोलन करेंगे ।

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