सागर श्रम न्यायालय समाप्ति पर वकीलों का विरोध, सागर में न्यायाधिकरण स्थापना की मांग, कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को सौंपा ज्ञापन

सागर

सागर ,केंद्र सरकार द्वारा 21 नवम्बर 2025 को जारी अधिसूचना के तहत 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नई श्रम संहिताएं लागू किए जाने के विरोध में लेबर बार एसोसिएशन सागर ने कड़ा एतराज जताया है। एसोसिएशन ने श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सागर में श्रम न्यायाधिकरण की स्थापना की मांग करते हुए प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को ज्ञापन सौंपा।
लेबर बार एसोसिएशन ने बताया कि नई श्रम संहिताओं को लागू करने से पूर्व न तो प्रस्तावित न्यायाधिकरणों का गठन किया गया और न ही उनकी कार्यप्रणाली स्पष्ट की गई। श्रम न्यायालयों को समाप्त किए जाने से लंबित मामलों की स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है और पीड़ित श्रमिकों को यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी सुनवाई किस मंच पर होगी।
एसोसिएशन के अनुसार कुछ कानूनों में न्यायिक कार्य श्रम विभाग को सौंपे जाने का प्रावधान किया गया है, जबकि श्रम अधिकारियों के पास विधिक अनुभव, पर्याप्त अधिकार, संसाधन एवं स्टाफ का अभाव है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।
लेबर बार एसोसिएशन ने यह भी कहा कि केवल 5 प्रस्तावित श्रम न्यायाधिकरणों के गठन से बुंदेलखंड क्षेत्र के श्रमिकों को सरल एवं सुलभ न्याय नहीं मिल पाएगा। श्रमिकों को न्याय के लिए भोपाल या जबलपुर जाना पड़ेगा, जो आम श्रमिक के लिए कठिन है।
एसोसिएशन ने मांग की कि विंध्य क्षेत्र की तर्ज पर बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए सागर में श्रम न्यायाधिकरण की स्थापना की जाए। सागर संभागीय मुख्यालय है और वर्तमान में श्रम न्यायालय सागर के अधिकार क्षेत्र में संभाग के 6 जिले आते हैं। साथ ही मांग की गई कि जब तक प्रस्तावित न्यायाधिकरणों का गठन नहीं हो जाता, तब तक श्रम न्यायालयों में सुनवाई यथावत जारी रखी जाए।
कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने ज्ञापन प्राप्त कर मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित स्तर पर रखने का आश्वासन दिया। मांग पत्र सौंपने वाले अधिवक्ताओं में आनंद सरवट,े राजेंद्र पाठक, शिवदयाल राजू बड़ोनिया, अरविंद सिंह राजपूत, आरती सिंघाई ,रमन जारोलिया, धीरज ताम्रकार, आशीष जैन, बबलू दुष्यंत मिश्रा, सुरेश चैधरी, अखिलेश दुबे, सुरेंद्र चैधरी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता साथी उपस्थित थे।

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