गढ़ाकोटा भारत सहित बुंदेलखंड में जगजाहिर भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा आज नगर गढ़ाकोटा में धूमधाम से निकलेगी। जिले की एक मात्र और प्रदेश की सबसे अनूठी 258वीं रथयात्रा शुकवार की शाम 6 बजे बैंडबाजे,अखाड़े,झांज,करतल ध्वनि के बीच सिद्ध क्षेत्र जगदीश स्वामी मंदिर पटेरिया से शुरू होगी। करीब 250 वर्षों से अधिक पहले हुई इस रथयात्रा में पूर्व मंत्री पंडित गोपाल भार्गव ने हर साल नित्य नये प्रयास कर भव्यता दी है। महामंडलेश्वर हरिदास महाराज ने बताया कि 22 फीट ऊंचे तीन अलग-अलग रथों पर भगवान जगन्नाथ स्वामी भैया बलराम और बहन सुभद्रा एक साथ निकलेंगे। जगदीश मंदिर व्यवस्थापक पं. मनोज तिवारी ने बताया कि रथो को खींचने के लिए हजारों भक्तों के अलावा साधु-संतों का आना शुरू हो गया है। परंपरा है कि रथ खींचते वक्त जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ के जयघोष लगाए जाते हैं। सिद्ध क्षेत्र पटेरिया मंदिर से रथ यात्रा शुरू होकर नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई बाजार स्थित मालगुजार परिवार के जनकपुरी मंदिर पहुंचती है। जहां बुंदेली परंपरा के अनुसार मिर्चवानी से भगवान का स्वागत होता है। रथयात्रा की अगवानी के लिए बाजार में गाजे-बाजे के साथ मालगुजार परिवार एवं समस्त जनकपुरवासी आते है। इस अनोखी ऐतिहासिक रथ यात्रा के लिए शहर को हफ्तों पहले दुल्हन की तरह सजाया जाता है। रथयात्रा का इस वर्ष 258 वां साल है और लगातार रथयात्रा से निकाली जा रही है। रथयात्रा की शुरुआत स्वामी जानकी दास महाराज ने की थी। और उन्हें स्वामी राम किशनदास महाराज के बाद पटेरिया जगदीश मंदिर की गद्दी सौंपी गई थी।

जगन्नाथ मंदिर के महंत हरिदास के साथ साधु संतो ओर महंतो के साथ क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव भगवान जगन्नाथ स्वामी के विग्रह स्वरूप को रथों पर विराजमान कर यात्रा का शुभारंभ करते है ओर जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ…. जय जगदीश जय जगदीश के घोष के बीच रथ यात्रा शुरू हो जाती है।
किवदंती है कि एक बार रथयात्रा के दौरान भीड़ तले एक बालिका की मौत हो गई थी। तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर ने हत्या के आरोप में महंत को गिरफ्तार कर लिया था। महंत ने पुलिस से बालिका को रथ के सामने रखने को कहा, उन्होंने भगवान जगन्नाथ स्वामी से प्रार्थना की और उन्हीं के प्रताप से बालिका जिंदा हो गई थी। भगवान जगन्नाथ स्वामी के इस चमत्कार के बाद पुलिस इंस्पेक्टर ने स्वयं एक रथ का निर्माण कराया था।
दूसरी किंवदंती हैं कि स्कंद पुराण के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न के पूछने पर महर्षि जैमिनी ने भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाली 12 यात्राओं का विवरण सुनाया था। श्रीकृष्ण ने रथयात्रा को सभी यात्राओं से श्रेष्ठ बताया है। पुष्प नक्षत्र युक्त आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन मुझको सुभद्रा और बलदाऊ को यात्रा कराने वालों के सभी मनोरथ पूर्ण होंगे।

शुद्ध घी और नर्मदा जी के जल से बनता है प्रसाद
मान्यता है कि एक बार महंत बीमार हो गए और वे नर्मदा तक जल लेने नहीं जा सके। नर्मदा मैया ने उनसे कहा कि मैं स्वयं आ रही हूं तुम रोज स्नान करना नर्मदा मैया की पहचान के लिए महंत अपना कमंडल एवं चमीटा वहीं छोड़ आए जो पटेरिया सिद्ध के सिद्ध बाबा के पास बनी लोंग झरिया में मिला था। एक बार रथयात्रा के समय प्रसाद बनाने के लिए रात्रि में घी कम पड़ गया था। महंत ने इसी लोंग झिरिया के जल को प्रसाद बनाने के लिए कड़ाओ में डलवा दिया था। जो शुद्ध घी में परिणित हो गया था दूसरे दिन जितना जल शुद्ध घी में परिणित हो गया था उतना ही शुद्ध घी वापस जल में समाहित किया गया।


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