, श्री सद्गुरु प्राकट्य महोत्सव, श्री 1008 रावतपुरा सरकार प्रकट उत्सव आश्रम वेदांती परिसर

विशाल 75 फीट सदाशिव भगवान की प्रतिमा लोकार्यण
सागर श्री रावतपुरा सरकार आश्रम वेदांती परिसर सागर में चल रहे सात दिवसीय श्री सद्गुरु प्राकट्य महोत्सव के अंतिम दिन 05 जुलाई को संत रविशंकर जी महाराज का जन्मदिन भक्तों ने बड़े धूमधाम से मनाया।

प्रातःकालीन बेला में अनुष्ठानों की अनुगूंज के साथ पूज्य महाराज श्री ने गौ-पूजन के साथ अपने दिन की शुरुआत की। इसके बाद श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति अभिजित मुहूर्त में सम्पन्न हुई। पूज्य महाराज श्री से मिलने के लिए दिन भर भक्तों का ताँता लगा रहा। सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त अपने गुरु के जन्मदिवस के पर्व पर उत्साहित नज़र आए।
इसके पश्चात भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के लोकार्पण के लिए आमंत्रित अतिथिगणों का आगमन वेदांती परिसर में हुआ। सबसे पहले सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं शिक्षाविद डॉ हरिसिंह गौर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ की गईं। मप्र शासन के उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, मंत्री प्रहलाद पटेल, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, रहली से वरिष्ठ भाजपा विधायक गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री एवं विधायक भूपेंद्र सिंह, विधायक शैलेन्द्र जैन, विधायक प्रदीप लारिया, जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, पूज्य शास्त्री जी महाराज, आनंद ब्रह्माचारी जी के साथ संतजन मंच पर उपस्थित रहे। विशाल सदाशिव भगवान की प्रतिमा के लोकार्पण के बाद परिसर में वृक्षारोपण किया गया। वही आस्था मंच के माध्यम से सभी अतिथियों ने अपने विचार साझा किए। 75 फिट ऊँची प्रतिमा के लोकार्पण के साथ वेदांती परिसर एक तीर्थ के समान नज़र आने लगा है।

भंडारे का क्रम पूरे दिन अनवरत जारी रहा…. जिसमे हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। उत्सव की सायंकालीन बेला में सभी भक्तों ने मिलकर संत श्री रविशंकर जी महाराज का जन्मदिवस मनाया और इसके साथ ही बुंदेली संस्कृति के रस में सराबोर भव्य सांस्कृतिक संध्या में जित्तू खरे बादल एंड ग्रुप ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया।

संत रविशंकर जी महाराज रावतपुरा सरकार ने अपने संदेश में भक्तों से एक वृक्ष लगाने और उसका पोषण समवर्धन करने की अपील की। उन्होंने कहा क्षमा धारण करने से जीवन के सभी विकार दूर हो जाते हैं, और व्यक्ति ऊपर उठने लगता है महान बन जाता है। प्रतिशोध एक ऐसी ज्वाला है जो स्वयं को झुलसाने का काम करती है। इसलिए विवेकवान बने क्षमाशील बने। जन्मदिन आशीर्वाद ग्रहण कर नए संकल्पों के सृजन का अवसर है इसलिए इस अवसर को महत्वपूर्ण मानते हुए स्वयं में परिवर्तन करें। वाणी, विचार, वातावरण में परिवर्तन करने से जीवन में न्यापन आता है। इसलिए परिवर्तन को स्वीकार करें आगे बढ़े और सभी को आगे बढ़ने में सहयोग करें।




