चांदामऊ की घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन

सागर
सागर जरूआखेड़ा थाना क्षेत्र के चांदामऊ गांव में 4 दिसंबर की रात हुई दिल दहला देने वाली घटना को आज लगभग 25 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक नरयावली पुलिस आरोपी फहीम के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी है। इस लापरवाही ने पुलिस प्रशासन और सरकार दोनों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना में आरोपी फहीम ने रात के अंधेरे में सोते हुए एक ही परिवार को जिंदा जलाने का प्रयास किया था। इस दर्दनाक वारदात में दो मासूम बच्चों की जलने से मौत हो चुकी है, जबकि उनकी बहन आज भी आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। इसके बावजूद पुलिस की निष्क्रियता पीड़ित परिवार के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
इस मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शहर की सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। वहीं चंदामऊ घटना के विरोध में कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन भी आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर नरयावली पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब बांग्लादेश में किसी हिंदू की मौत होती है, तब देशभर में आंदोलन खड़े कर दिए जाते हैं, लेकिन सागर जिले में इतनी बड़ी और जघन्य घटना होने के बावजूद न तो थाना प्रभारी पर कार्रवाई हुई और न ही जिला पुलिस प्रशासन से जवाबदेही तय की गई। यह दोहरा मापदंड क्यों?
आम जनता सवाल कर रही है कि जब मामला मध्यप्रदेश के सागर जिले का है, जहां पुलिस को सीधे कार्रवाई करनी थी, तो 25 दिन बाद भी आरोपी खुलेआम कैसे घूम रहा है। क्या यह न्याय व्यवस्था की विफलता नहीं है?
प्रदेश में हिंदूवादी सरकार होने का दावा करने वाली सत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। न तो सरकार टीआई पर कार्रवाई कर पा रही है और न ही जिला पुलिस प्रशासन के खिलाफ सख्त कदम उठाने का साहस दिखा रही है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान हिंदू संगठनों के नेताओं ने जमकर पुलिस के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया और प्रशासन पर पक्षपात व लापरवाही के आरोप लगाए। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।







