सागर
देवरी विकासखंड के ग्राम बीना का मामला, ग्रामीणों ने पाइप और बिजली के खंभों से बनाया जुगाड़ का पुल
सागर देवरी विकासखंड मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत बीना, जो रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के प्रवेश द्वार के पास और जैन अतिशय क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध है, वहां के ग्रामीण और स्कूली बच्चे आज भी अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं।
ग्राम पंचायत बीना से होकर निकलने वाली नदी के उस पार करीब 30 परिवारों के लोग निवास करते हैं। इन ग्रामीणों के लिए बीना मुख्यालय और स्कूल की दूरी नदी पार करने पर आधा किलोमीटर से भी कम रह जाती है, लेकिन यदि वे सुरक्षित रास्ते से रानीताल होते हुए बीना जाना चाहें तो उन्हें करीब 8 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। यही वजह है कि ग्रामीणों ने पाइप और बिजली के खंभों से जुगाड़ का पुल बना लिया है ताकि किसी तरह रोजमर्रा के कामकाज और बच्चों की पढ़ाई जारी रह सके।
मगरमच्छों से दहशत में ग्रामीण
नदी में पिछले कुछ समय से मगरमच्छों की संख्या बढ़ रही है। आए दिन मगरमच्छ मवेशियों और अन्य जानवरों का शिकार कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी पार करते समय बच्चों और बुजुर्गों की जान पर हमेशा खतरा बना रहता है, लेकिन अब तक जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रशासन का दावा – पुलिया का प्रस्ताव स्वीकृत
इस मामले पर देवरी तहसीलदार का कहना है कि ग्रामीणों के पास एक वैकल्पिक सुरक्षित रास्ता मौजूद है, लेकिन शॉर्टकट के चक्कर में वे नदी को पार करते हैं। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को समझाइश दी गई है कि वे अपने बच्चों को नदी के रास्ते स्कूल न भेजें। वहीं, तहसीलदार ने यह भी बताया कि बीना नदी पर पुलिया निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है और इसका काम जल्द ही शुरू किया जाएगा।
स्थानीय लोगों की मांग:
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी पुल नहीं बनता, तब तक अस्थायी रूप से सुरक्षित पैदल पुलिया या नाव की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।



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