मध्य प्रदेशसागर बुंदेलखंड

मालथौन ब्लॉक के ललोई गांव ने खत्म की “परग“ कुप्रथा 17 वर्ष बाद मिल कर बेटी का विवाह समारोह किया

पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह वर वधु को आशीर्वाद देने पहुंचे

ललोई,मालथौन। यहां के ग्राम ललोई में बेटियों के विवाह नहीं होने की ’परग’ नामक कुप्रथा को तोड़ते हुए ग्रामवासियों ने मिल कर एक गरीब बेटी का विवाह धूमधाम से करके गांव में बेटियों के विवाह की शुरुआत की।
बीते 17 वर्ष बाद हुए पहले विवाह समारोह में पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने पहुंच कर वर वधु को आशीर्वाद दिया
और इस कुरीति की जंजीर को तोड़ कर फेकने के लिए ग्रामवासियों को बधाई दी।
सागर जिले के मालथौन विकास खंड का ललोई गांव लगभग ढाई सौ घरों की ढाई हजार आबादी वाला बड़ा गांव है। 17 वर्ष पूर्व हुई एक आपराधिक घटना के बाद गांव में ’ परग ’ लगने की प्रथा मानते हुए सिर्फ बेटियों के वैवाहिक कार्यक्रम करने पर निषेध मान लिया। उल्लेखनीय है कि यह कुप्रथा बेटों के विवाह को नहीं रोकती लेकिन बेटियों के वैवाहिक कार्यक्रमों पर ही रोक लगा देती है। परिणाम स्वरूप ग्रामवासी अपनी बेटियों के विवाह समारोह दूसरे कस्बों, ग्रामों में करने बाध्य होते थे जिससे उनका खर्च अत्यधिक बढ़ जाता था। इसका दुष्प्रभाव गरीब और अभाव ग्रस्त परिवारों पर बोझ के रूप में सामने आता है।
पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को अंधविश्वासों व कुरीतियों की जड़ता से समाज को मुक्त करने की जागरूकता के लिए अपने सभी उद्बोधनों में निरंतर प्रेरणा दी है। इसका सकारात्मक प्रभाव ललोई में परग प्रथा के विरोध में गांव वालों द्वारा उठाए गए सामूहिक कदम के रूप में देखने मिला है।
ललोई ग्राम वासियों ने गरीब आदिवासी परिवार की बेटी मानसी गौड़ का विवाह सभी ग्रामवासियों की सहमति व आर्थिक सहयोग से कराया गया। सरपंच बादल सिंह ने बताया कि लगभग तीन लाख रूपए एकत्रित कर यह विवाह समारोह पूरे हर्ष उल्लास से कराया गया। दमोह जिले के नरसिंहगढ़ से आई बारात के स्वागत सत्कार में गांव के सभी महिला पुरूषों ने हिस्सा लिया। उन्होंने पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह को भी विवाह समारोह में शामिल होने आमंत्रित किया।
वरवधु को आशीर्वाद देते हुए विवाह समारोह को संबोधन में पूर्व गृहमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि कितनी बड़ी विडंबना है कि हम कन्याओं को देवी स्वरूपा मान कर पूजते हैं लेकिन ऐसी कुरीतियों को सहन कर लेते हैं जो समाज में बेटियों का तिरस्कार करती हैं और उनसे भेदभाव करती हैं। उन्होंने कहा कि समाज को समय के साथ अपनी बुराइयों और कुरीतियों को छोड़ते जाना चाहिए यह स्वस्थ और समृद्ध समाज के लिए आवश्यक है। ग्राम ललोई के सभी जनप्रतिनिधियों, नागरिकों को उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि आगे यहां बेटियों के विवाह समारोह भी इसी एकजुटता और सद्भाव के साथ होंगे और मैं भी उन सभी समारोहों में शामिल होना चाहूंगा।

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