
डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय की ८० वीं वर्षगांठ: पूर्व छात्र संगठन अध्यक्ष अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा – “डॉ. गौर भारत रत्न के हकदार”
सागर। डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर ने 18 जुलाई 1946 को अपनी स्थापना के बाद 80 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस गौरवशाली अवसर पर नगर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ विश्वविद्यालय के संस्थापक भारत रत्न के हकदार डॉ. सर हरिसिंह गौर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर पूर्व छात्र संगठन, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी कोषाध्यक्ष अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा कि “डॉ. सर हरिसिंह गौर जैसी महान शख्सियत विरले ही होती हैं। वे न केवल दानवीर, शिक्षाविद् और कानूनविद थे, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी नेता थे जिनकी वजह से आज समूचे सागर, बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश की पहचान भारत और विश्व में स्थापित है। उन्होंने अपना सर्वस्व शिक्षा को दान कर दिया।”
उन्होंने आगे कहा “समूचे शिक्षा जगत में हमें पहचान दिलाने वाले डॉ. गौर ने 18 जुलाई सन 1946 में इस विश्वविद्यालय की नींव रखी थी। उस समय बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में उच्च शिक्षा का मंदिर स्थापित करना अपने आप में एक क्रांति थी। आज इस विश्वविद्यालय से निकले लाखों छात्र देश-विदेश में बुंदेलखंड का नाम रोशन कर रहे हैं। डॉ. गौर का जीवन त्याग, सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। वे वास्तव में भारत रत्न के सच्चे हकदार हैं।”
श्री केसरवानी ने कहा कि “आज 80 वीं वर्षगांठ पर हम सबका दायित्व है कि हम डॉ. गौर के आदर्शों को आगे बढ़ाएं। शिक्षा को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बनाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विश्वविद्यालय की प्रगति में हम सबको अपना योगदान देना चाहिए।”
अंत में उन्होंने डॉ. गौर के श्री चरणों में सादर नमन करते हुए कहा “डॉक्टर गौर के श्री चरणों में सादर नमन। शत शत नमन”
डॉ. सर हरिसिंह गौर एक महान शिक्षाविद्, विधिवेत्ता और समाजसेवी थे। उन्होंने अपनी संपूर्ण संपत्ति दान कर मध्य प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय सागर में स्थापित किया। वे भारतीय संविधान सभा के सदस्य भी रहे और शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए जाने जाते हैं। बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र, अधिवक्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे




