
सागर जिले के बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां इलाज के बाद डेढ़ साल के एक मासूम बच्चे की आंखों में संक्रमण हो गया और उसकी रोशनी चली गई। पीड़ित परिवार ने शनिवार को बंडा थाने पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

भूसा कमलपुर निवासी शिकायतकर्ता इंद्राज विश्वकर्मा ने बताया कि उनके डेढ़ साल के बेटे विनय विश्वकर्मा को सर्दी और आंखों में लालिमा की शिकायत थी। इसका इलाज कराने के लिए वे 29 मई को बंडा सिविल अस्पताल गए थे। ओपीडी की पर्ची बनवाने के बाद ड्यूटी डॉक्टर ने बच्चे की जांच की।

डॉक्टर ने बच्चे को एक आई ड्रॉप, पैरासिटामोल सिरप, एक इंजेक्शन और कुछ अन्य दवाइयां दीं। पिता के मुताबिक, दवा देने के बाद वे करीब 3 से 4 घंटे तक अस्पताल में ही रुके रहे, लेकिन बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को जिला अस्पताल सागर रेफर कर दिया। सागर में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को किसी उच्च चिकित्सा संस्थान में ले जाने की सलाह दी।
पिता इंद्राज ने बताया कि वे बेटे का बेहतर इलाज कराने के लिए उसे भोपाल एम्स (AIIMS) लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने चेकअप के बाद बताया कि बच्चे की आंखों में गंभीर संक्रमण हुआ है और इसी संक्रमण के कारण उसकी आंखों की रोशनी चली गई है।

इंद्राज का दावा है कि एम्स के डॉक्टरों ने इसे इलाज में हुई लापरवाही बताते हुए पुलिस से शिकायत करने की सलाह दी थी। भोपाल से लौटने के बाद पिता ने बंडा थाने जाकर शिकायती आवेदन दिया है। हालांकि, पिता का आरोप है कि थाने में अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई है।
अस्पताल और पुलिस प्रबंधन का पक्ष, जांच जारी बंडा सिविल अस्पताल के सीबीएमओ डॉ. योगेंद्र खटीक ने इस मामले में अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि बच्चे को कॉर्नियल अल्सरेशन, कुपोषण और आंखों में संक्रमण की समस्या थी। इसी कारण उसे सुपर स्पेशलिस्ट के पास जिला अस्पताल सागर रेफर किया गया था। उन्होंने आश्वासन दिया है कि यदि इलाज में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो जांच के बाद निश्चित कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, बंडा थाना प्रभारी अंजली उदैनिया ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पीड़ित पक्ष ने थाने में आवेदन दिया है और पुलिस मामले की गहनता से जांच करवा रही है।



